सन. 1952 में भारतीय रेल प्रणाली के एकीकरणसमाकलन के समय,41 मरम्मत कारखाने लोको मोटिव,वैगन एवं सवारी डिब्बों की, सामयिक पूरी मरम्मत कार्य को करते थे। रोजमर्रा की मरम्मत का कार्य 300 से अधिक मरम्मत डिपो और सिक लाइनों में किया जाता था।
भारतीय रेलों की योजनाबद्ध विकास के लिए शताब्दी की अन्तिम तिमाही ने वैगनों,सवारी डिब्बों के नये प्रकारों के विकास के साथ कर्षण शैली में व्यापक परिवतनों के संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं, डीजल एवं विद्युत चालित लोकोमोटिव ने भाप चालित इंजनों को धीरे-धीरे बाहर कर दिया है। यात्री सेवा में सवारी डिब्बों की संख्या प्रमुखतः दोगुनी हो चुकी है। वैगन स्टाक होल्डिंग जो सन् 1952 में थी अब मोटे तौर पर वह 2.5 गुना है, वित्त्तीय सीमाओं के आड़े रखरखाव,सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया जो रोलिंग स्टाक की वृद्धि के लिए अनुकूल था। सन् 1952 से माना पांच ही नई वर्कशाप कारखानें स्थापित की गई, रखरखाव की बढी़ हुई मांग उपलब्ध सुविधाओं के समय-समय पर किए गए विस्तार के द्वारा ही पोषित हो सका। रेलों के कुलव्यय योजना के 2.5 प्रतिशत से भी कम कारखानों पर व्यय किया गया। यद्यपि रोलिंग स्टाक की नई आवश्यकता की पूर्ति के लिए तीन ही नई उत्पादन कारखाने स्थापित हो सके।
रोलिंग स्टाक के रखरखाव और निर्माण में आई समस्याओं का समाधानमुकाबला पु राने मशीनी एवं प्लांट,विभिन्न उत्पाद मिश्रण एवं कर्मियों के खाने से ही मुख्यतः संभव हुआ। मशीनरी एवं प्लांट की स्थिति बड़ी चिन्ता का एक स् है। सन् 1979 में अधिक आयु वाली मशीनों का अनुपात जो 1952 में 47 प्रतिशत था वह बढक़र 77 प्रतिशत हो गया था। रखरखाव निधि की कमी के कारण, कारखाना आधुनिकीकरण प्रोग्राम के प्रथम चरण में जिसमें मार्च 1983 तक पूरा होने की आशा थी के लिए 95 मिलियन डालर की निधि उपलब्ध कराने हेतु विश्व बैंक के अन्तर्राष्ट्रीय विकास संघ के साथ एक समझौता हुआ था। अन्य सात सालों में द्वितीय एवं तृतीय चरण के कार्यकलाप के लिए रु0 400 करोड़ जिसमें औद्योगिक विकास अधिकरण शाखा भी सम्मिलित है का एक अनुमानित व्यय का चिन्तन हुआ था।
इस अपूर्व महत्वपूर्ण प्रयास से भारतीय रेलों ने एक विशेष संगठन स्थापित किया है, जो पूर्ण रुपेण इस कार्य के प्रोत्साहनविकास के प्रति समर्पित है। इस प्रकार कॉफमो आधुनिकीकरण प्रोग्राम को लागू करने के लिए सन् 1978 में अस्तित्व में आयास्थापित किया गया था।
कॉफमो,मशीनरी एवं प्लांट के चयन,आपूर्ति एवं आधुनिक तकनीक वर्कशाप के प्रवेशयःके लिए भारतीय रेलों में अब एकनिर्दिष्ट संस्था है। |