अपनाएं सकारात्मक व्यवहार

व्यविᆬत की प्रवृत्ति से ही उसके वास्तविक गुणों की गणनाहोती  है । प्रवृत्ति में ही आशावाद या निराशावाद के बीज छिपे होते हैं । समसामयिक परिस्थितियों के प्रति व्यविᆬत का व्यवहार व नजरिया एक खुश और नाखुश व्यविᆬत के बीच सबसे बड़ा अंतर पैदा करता है । यह सही है कि हर समय हर कोई खुश नहीं रह सकता है । लेकिन कठिन से कठिन परिस्थितियों से भी खुशियां निचोड़ लेने की क्षमता आप में होनी ही चाहिए । निराशावादी लोगों को विभिन्न वस्तुओं या परिस्थितियों के प्रति नजरिए में परिवर्तन लाना चाहिए। आए दिन हम सभी किसी न किसी विषय पर नाराज तो होते ही हैं। कभी-कभी इस कारण पूरा दिन खराब हो जाता है लेकिन बेहतर सोच व समय के साथ भंयकर प्रतीत होने वाली घटनाएं भी छोटी लगने लगती हैं । परिवार में किसी प्रिय की मृत्यु या कोई बड़ी दुर्घटना हो जाने पर ऐसा लगता है कि मानो पहाड़ टूट गया हो किंतु समय गुजरने के साथ-साथ इसका प्रभाव कम होता जाता है। धीरे-धीरे हम इस बात को स्वीकार करने लगते हैं कि इस तरह की घटनाओं को टाला नहीं जा  सकता ।

एक बुरा बॉस या झगड़ालू पत्नी या पति आपको थोड़े समय के लिए परेशान कर सकते हैं । लेकिन जब आप जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया अपना लेते हैं तो किसी भी कठिन परिस्थिति से निकलना मुश्किल नहीं होता । प्रतिकूल परिस्थितियों निपटने का अच्छा तरीका यह है कि आप सकारात्मक और विजय प्राप्त करने वाले विचारों से काम लें । सकारात्मक विचारों पर अडिग रहने का मतलब होता है आधी जंग जीत लेना । सकारात्मक विचारों को अपनाकर ही सफलता और असफलता के बीच के अंतर को पाट सकते हैं। जरूरी नहीं है कि हर परिस्थितियों में सफलता ही मिले । लेकिन हर परिस्थिति से कुछ न कुछ लाभ तो लिया ही जा सकता है । सकारात्मक व्यवहार हमें सभी तरह की परिस्थिति से वास्तविक मूल्यांकन की क्षमता प्रदान करता है । वहीं दूसरी तरफ नकारात्मक सोच बड़ी-बड़ी बाधाएं खड़ी कर देता  है । कई बार ये बाधाएं वास्तविक होती हैं तो कई बार मात्र काल्पनिक ।

नकारात्मक विचारों से स्वयं के साथ-साथ अपने सगे-संबंधियों को भी मानसिक ठेस पहुंचती है । इस कारण इससे बचने का उपाय करना चाहिए । सकारात्मक व्यवहार से ही हम इस तरह की बातों से पीछा छुड़ाते हुए स्वयं को नई परिस्थितियों के लिए तैयार कर सकते  हैं । इसलिए स्वयं को मजबूत बनाने का प्रयास करना चाहिए । मानसिक रूप से मजबूत व्यविᆬत प्रतिकूल परिस्थितियों में भी स्वयं को बिल्कुल सुरक्षित रखता है । इस तरह के व्यविᆬत न केवल स्वयं को किसी घटना का शिकार होने से बचाते हैं बल्कि उन समस्याओं पर विजय भी प्राप्त करते हैं ।

जो भी व्यविᆬत विजेता बनना या अपने व्यविᆬतत्व का विकास करना चाहता है, उसे ज्यादा से ज्यादा ध्यान सकारात्मक व्यवहार पर केंद्रित करना चाहिए । इससे सभी तरह की उपलब्धियों को प्राप्त करने में सहायता मिलती है । सभी तरह की सुख-सुविधाओं का मालिक होने का मतलब सिर्फ खुशियां ही आपके हिस्से में हो, जरूरी नहीं है । सकारात्मक प्रवृति वाला व्यविᆬत सीमित आय में धनी व्यविᆬत की अपेक्षा ज्यादा खुश रह सकता है । जीवन को बदलने के लिए हमें खुद के बारे में बनाई गई धारणाओं को भी बदलना पड़ता है । जब हम अपनी सोच, व्यवहार और मान्यताओं में बदलाव लाते हैं तो पूरा जीवन स्वत: ही बदलने लगता है।

जब किसी सकारात्मक लक्ष्य के लिए अपने अंदर परिवर्तन लाते हैं तो कुछ भी पाना असंभव नहीं होता । स्वयं को बदलने की कुंजी हर व्यविᆬत के हाथ में होती है । ज्यादातर लोग समस्याएं आने पर ही खुद में बदलाव लाते हैं । जो व्यविᆬत हृदय रोग या डायबिटीज से पीडि़त हैं । उन्हें सामान्य जीवन जीने के लिए अपने खान-पान की आदतों में परिवर्तन लाना होता है । जीवन को आराम और चैन के साथ जीना भी हमारा एक उद्देश्य है । अंत: समस्या के पैदा होने से पहले ही अपने अंदर आवश्यक परिवर्तन लाना जरूरी होता है । किसी समस्या के उत्पन्न हो जाने के बाद दबाव में कुछ करने की बजाय यह एक बेहतर विकल्प है । हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि हम खुद से किए गए वादों को पूरा करें । इन वादों को पूरा करने से हमें हमेशा लाभ मिलता है ।

हार न मानें

     हर युवा का एक सपना होता है, उसे पूरा करने के लिए बहुत हद तक वह कोशिश भी करता है । कुछ के सपने पूरे हो जाते हैं, कुछ सपनों में ही खो जाते हैं । सपना तो अवश्य ही देखें, लेकिन उन सपनों को पूरा करने से पहले ही हार मान लेना या उन्हें बीच में छोड़ देना सफलता की दूरी कई कदम और बढ़ा देता है । सफलता के लिए कुछ बातों पर ध्यान दें ।

सपनों को साकार करने से हार न मान
     अपनी सोच को सही तरीके से सपनों को पूरा करने के लिए अमल में लाने का प्रयास करें । हर व्यविᆬत के अपने सपने होते हैं, जो बहुत महत्वपूर्ण होते हैं । एक अच्छी सोच के बावजूद डरते हैं कि कहीं लोग हम पर हंसेंगे, यह जानकर आश्चर्य होगा कि ज्यादातर लोग अपने सपने इसलिए नहीं पूरे कर पाते क्योंकि वे उनके टूट जाने या पूरा न हो पाने के डर से परेशान रहते हैं । युवाओं को स्वयं से कहना होगा कि उनमें सपनों को पूरा करने की क्षमता है और आप उन्हें पूरा होता देखेंगे ।

अपनी थकान से हार न मानें
     हर समय काम करने के लिए खुद को मजबूर न करें । युवाओं को जीवन में संतुलन का विशेष ध्यान रखना चाहिए । अगर लगातार स्वयं से कठोरता से काम लेंगे तो जल्दी ही थक जाएंगे । इससे आपकी कार्य क्षमता में गिरावट आने लगेगी और काम करते समय गलत निर्णय लेने से भी कार्य क्षमता प्राय: समान होती है । परन्तु जो युवा अपने आप को थका मान लेता है, वह उतना काम नहीं कर पाता, जितना उसे करना चाहिए । इसलिए युवाओं को अपनी थकान से हार नहीं माननी चाहिए ।

अपने तनाव से हार न मानें
     काम के दबाव में थोड़ा-बहुत तनाव होना अवश्यंभावी है । यदि आपके कुछ लक्ष्य सपने और उद्देश्य हैं और सब कुछ उनके विपरीत हो रहा है तो आप तनाव महसूस करने लगते   हैं । इस तनाव की स्थिति से निकलने के लिए आपको बस इतना करना है कि आप अपने काम पर और खुद पर विश्वास रखें । आवश्यकता हो तो थोड़ा तनाव मुक्त होने का प्रयास करें और किसी और काम में मन लगाएं ।

अपनी निगेटिव इमेज से हार न मानें
     निगेटिव इमेज कभी-कभी आपकी सफलता में बाधा बनकर सामने आती है, जो आपके सपनों और उद्देश्य को प्रभावित करती है । आप काम आरम्भ करने से पहले ही निराश हो जाते है । अपनी छवि के बारे में यह सोच स्वयं आपके द्वारा विकसित की गई है, जिसे केवल आप अनुभव करते हैं । ऐसे समय में आप खुद से कहने लगते हैं कि मैं अच्छा नहीं  हूं । मुझे सही लोगों की पहचान नहीं आदि……। इन परिस्थितियों में आपको अपनी सोच नकारात्मक से सकारात्मक में बदलने का प्रयास करना चाहिए, जिससे आप हर कार्य में निपुण हो जाएंगे ।  
      बस एक ही बात कहेंगे कि ऐसा कोई काम नहीं है, जो मैं नहीं कर सकता । स्वयं को पहचानिए, उस क्षेत्र को पहचानिए, जिसमें आप जाना चाहते हैं । महत्वाकांक्षा और पूरी लगन से उसे पूरा करने का प्रयास करें । 

अपनी गलतियों से हार न मानें
     आपके कार्य की कई बार आलोचना की जाती है । यह आलोचना आपको अवसर प्रदान करती है अपनी कार्य क्षमता में सुधार लाने का । गलतियां सभी से होती हैं, मगर सफलता उन्हीं को मिलती है, जो गलतियों से सीखते हैं । जीवन में आपको ऐसे बहुत से लोग मिलेंगे, जो आपकी सदैव आलोचना करेंगे । वे आलोचना करने के लिए ही बने हैं । इन सभी बातों को नजरंदाज करते हुए अपने काम को साबित करने का प्रयास करें । अपने ऊपर गलतियां हावी न होने दें । आगे बढ़कर काम सीखने और उस पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास करें ।

अपने असफल नेतृत्व से हार न मानें
     सफलता प्राप्त करने के लिए नेतृत्व का गुण आवश्यक है, जिससे किसी कार्य को करने की पहल कर सकें । साथ ही उस पर नियंत्रण रखें और उस कार्य को बीच में न छोड़ें । नेतृत्व अच्छे बुरे की समझ देता है और विपरीत परिस्थितियों में नियंत्रण करने में सहयोग देता है, जिससे हार का मुंह न देखना पड़े । जीवन में ऐसे ही मोड़ आते हैं, जब हम परिस्थितियों और प्रयासों के बीच संतुलन स्थापित नहीं कर पाते और ऐसे में हमारा नेतृत्व कभी-कभी असफल हो जाता है । युवाओं को याद रखना चाहिए कि कोई भी कम्पलीट नहीं होता है । यदि कभी असफलता हाथ भी लगे तो समस्या को गंभीर होने से रोकने का प्रयास करें और कार्य को पूरा करने की सामर्थ्य रखें । यही वास्तविक नेतृत्व है ।

भविष्यवाणी से हार न मानें
     कभी-कभी हम अपने राशिफल में की गई विपरीत भविष्यवाणी को पढ़कर निराश हो जाते हैं । इन बातों पर विश्वास करने की जगह खुद पर और अपने सपनों पर यकीन करें । आपके अन्दर अपने भाग्य का निर्माण करने की क्षमता होती है । ‘गिलास में आधे भरे पानी को देखें न कि आधे खाली गिलास को ।’ ‘मैं कर सकता हूं’ बस इसे याद रखें ।  आपको सफलता प्राप्त करने में कोई नहीं रोक सकता है । युवाओं को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए । 

बचे वाकयुद्ध से
विद्वानों का कहना है कि यदि आपके बारे में कोई गलत बात कही जाती है और इसमें अगर सत्यता हो तो सब से पहले हमें अपने आप में सुधार करना चाहिए । यदि यह असत्य है तो इसे हंस कर टाल देना चाहिए । जब हताशा से भरे लोग आप पर बार-बार हमला करते हों तो ऐसी स्थिति में खुद पर काबू करना मुश्किल हो जाता है । एकाग्र चित्त और उत्साहित रहना भी कठिन हो जाता है । विभिन्न तरह के लोग अपने द्वारा किये गये व्यवहार या असहयोगात्मिक शब्दों के प्रति अलग-अलग सिद्धान्त अपनाते हैं । ऐसा आपके परिवार और दोस्तों के बीच भी होता है । यह सोचना अव्यवहारिक ही होगा कि आपके सपने को पूरा करने में सभी लोग आपकी सहायता करेंगे । जरूरी यह है कि आप किसी से सहयोग न मिलने की स्थिति के लिये सदा तैयार रहें । जीवन की कठिन परिस्थितियों के लिए आपको शमिर्ंदा होने की जरूरत नहीं है । यदि कोई आपको नीचा दिखाने की कोशिश करता है तो इससे परेशान हुए बिना ऐसी बातों को नजर अंदाज कर दें । इन बातों पर ध्यान देने की बजाय अपने दृष्टिकोण को आगे रखने का प्रयास करें । आपको अपनी लड़ाई के हथियार चुनते समय बेहद सावधानी और बुद्धिमानी से कदम उठाने चाहियें । जो बातें आपके सपनों की पूर्ति करने में बाधक हैं या आपके आत्मविश्वास को कमजोर करते हों, ऐसी नकारात्मक चीजों को खोज कर अपने सामने लाएं । ऐसा करते समय किसी गलत चीज को न पकड़ लें इस बात को ध्यान रखें । एक अधिकारी अपने बॉस और सहकर्मियों से लड़ते रहते थे । इस कारण किसी अच्छे काम को उन्हें क्रेडिट नहीं मिलता था । तब उनके बॉस ने सलाह दी कि कभी-कभी बड़े युद्ध जीतने के लिए छोटी लड़ाईयां हार जाना बेहतर होता है ।

      अपने सपने को जीवंत बनाने के लिए इसके आत्मीय पहलूओं  का ध्यान रखें । अपनी योग्यता तथा शक्ति को पहचाने । यदि कोई आपकी सफलता से जलता है या क्रोधित होता है तो होने दीजिए क्योंकि यह एक स्वाभाविक मानवीय प्रवृति है । इस तरह के लोग जो करना चाहते हैं उन्हें करने दीजिए, ऐसे लोग दूसरों की गलतियां निकालने या गप हांकने में समय बर्बाद करने के सिवा और कुछ नहीं कर सकते ।

      जो लोग सफलता प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें डरने की जरूरत नहीं है । यदि आप जरूरत के अनुसार स्थितियों को बदलना चाहते हैं तो अपने वर्तमान की परिस्थितियों में बदलाव कीजिए । सफलता पाने वाले व्यक्ति किसी चीज को करने का साहस रखते हैं इसलिए उनके सपने वास्तव में साकार होतें हैं । सफलता के साथ प्रतिद्वंद्धि पैदा होने सामान्य बात है । जैसे किसी व्यक्ति को आगे बढ़ने के लिए जरूरी हो जाता है कि किसी न किसी को पीछे छोड़े । कुछ लोग अपनी सफलता के प्रति हीन भावना से ग्रस्त होते हैं और अपना ज्यादा समय दूसरों की योग्यता या सफलता से अपने आपको बेहतर साबित करने में बर्बाद कर देते हैं । अपने लिए की गई शिकायतों पर सदा ध्यान दें क्योंकि यह आपको दूसरों से बेहतर बनने में सहायक होती है ।

      आपको अपनी उपलब्धियों या सफलताओं पर बहस करने की जरूरत नहीं है । यदि आप ऐसा करते हैं तो यह आपके आत्मविश्वास को घटाता है । अपनी सफलताओं को उचित ठहराने की बजाय अपने लक्ष्य को पाने के लिए अपने अनुभव और क्षमताओं को सही दिशा में बढ़ाएं । हमेशा यह याद रखें कि हमें अपनी लड़ाई खुद लड़नी होती है, इसके लिए किसी दूसरे का सहयोग काम नहीं आता । यदि कोई दूसरा व्यक्ति अपने लक्ष्य को पाने में सफल रहता है तो यह जरूरी नहीं कि उस लक्ष्य को पाने में आप भी असफल हो जाएगें । जरूरी है कि आप लक्ष्य को पाने के लिए उससे कड़ी मेहनत करें और यह भूल जाएं कि दूसरों को किस तरह कि समस्या का सामना करना पड़ा । किसी भी लक्ष्य को पाने में सब से बड़ी समस्या नकारात्मक चीजें होती हैं । इसलिए इसको  कभी अपने ऊपर हावी ना होने दें । कुछ लोग अपमानजनक प्रश्नों के द्वारा हमें नीचा दिखाने की कोशिश करतें हैं । जैसे आप अपने व्यवसाय में अच्छा नहीं कर पातें या पैसा नहीं कमा पाते तो तब क्या करेंगें ? इस तरह के लोग सोचते हैं कि मैं इनसे श्रेष्ठ हूं इसलिए यह मेरा अधिकार है कि वे मुझे व्यक्तिगत बातें बताएं । इस तरह के लोगों से निपटने के लिए आप कुछ तरीके अपना सकते हैं । आप इनके रास्तें में खुद हट जाएं या अपने तीक्ष्ण बुद्धि की धार से इन्हें हटा दें । किसी भी चीज से पीछा छड़ाने के लिए हमेशा यह कहें कि मैं इस विषय पर बात नहीं करना चाहता हूं या यह मामला खत्म हो गया है । इस तरह की बातों के प्रति यह भी कहा जाता है कि मैं अपने आपको इस विषय में बात करने में असहज महसूस कर रहा हूं । यदि आपका ऐसे लोगों से सामना होता है जो आपसे यह जानना चाहते हैं कि असफल होने पर आप क्या करेंगें तो उनसे आप सीधे कहें कि मैं अपना काम बहुत अच्छी तरह से कर रहा हूं । मुझे अपनी जिन्दगी में जितना पैसा चाहिए उससे ज्यादा आराम से कमा रहा हूं । आप उनसे कहें कि आप अभी कितना कमाते हैं या आपकी पत्नी का स्वास्थ्य कैसा है या आपके बच्चे ने पिछली परीक्षा में कितने अंक लिये थे इत्यादि । यदि ऐसे लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आये तो उनसे सीधे कहें कि आप मुझसे इस तरह का प्रश्न कई बार कर चुके हैं । यदि आप इन बातो पर ध्यान दें तो इस तरह की परिस्थितियों से निकल सकते हैं । जब यह तरीका भी काम न करें तो आप उस जगह से कुछ बहाना बना कर निकल जाएं ।

जिन्दगी समझौते का दूसरा नाम है । जो हम सोचते हैं या जो चीज पाना चाहतें हैं वह हमेशा हमें नही मिलती । कभी-कभी लोग किसी चीज को पाने की योग्यता रखतें हैं लेकिन अपनी योग्यता को कम करके आंकतें हैं । द्वेषपूर्ण प्रतियोगिता से बचने का  सबसे अच्छा तरीका है, अपने आपको सर्वश्रेष्ठ साबित करना । कोई माने या न माने आपकी सफलता आपकी सफलता आपको जरूर मान्यता देगी । दूसरो द्वारा की गई प्रशंसा अथवा निंदा में पड़ने की आवश्यकता नहीं है । सफल होने के लिए आपको लोगों के प्रमाण पत्र पाने की कोई जरूरत नहीं है । आप अपने लक्ष्य पर ध्यान रखते हुए सदा आगे बढ़ते रहें सफलता जरूर मिलेगी ।

 

दिनचर्या

आयुर्वेद की नजर में प्रतिदिन किए जाने वाले स्वस्थ आचरण का नाम ही दिन चर्या है । यदि हम इस सब से पुराने जीवन शास्त्र में दिए गए निर्देशों का पालन करें, तो बिमारियां हमसे भरसक दूर ही रहेंगी । माना कि आज के माहौल में आयुर्वेद में बताई गई  जीवनशैली को पूरी तरह अपना पाना आसान नहीं रह गया है, भी जितना हो सके; अपनाने की कोशिश करनी चाहिए; लाभ निश्चित रूप से होगा ।

सुबह की दिनचर्या
1     ब्रह्ममुहूर्त में उठना : आयुर्वेद में ब्रह्ममुहूर्त में उठने को कहा गया है । यह समय सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पहले का होता है । मॉडर्न मैडीकल साइंस में किए गए शोधों से यह भी साफ हो चुका है कि जो लोग सूर्योदय से पहले बिस्तर छोड़ देते हैं, उनका इम्यून सिस्टम देर तक सोने वालों के मुकाबले काफी मजबूत होता है । शोधो से यह बात भी स्पष्ट हो चुकी है कि सुबह उठने से याददाश्त तेज होती है, इसलिए सुबह उठकर पढ़ने वाले विद्यार्थियों का शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास भी अच्छा होता है ।

2     शोच क्रिया :  सुबह उठकर शोच जाने से पहले कुछ लोगों को पानी पीने की आदत होती है । हालांकि चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और वाग्भट्ट ने सुबह पानी पीने का निर्देश नहीं दिया है , लेकिन भावप्रकाश सुबह उठने पर चुल्लु भर पानी पीने का उल्लेख जरूर है । पानी अगर गुनगुना पिया जाये तो, आंतों में सिकुडन और फैलाव अच्छी तरह से होता है जिससे पेट बढिय़ा साफ होता है । पानी पीने से पहले मुंह में ठंडा पानी भरकर आंखों को ठंडे पानी की छींटे मारने चाहिए । इससे आंखों की रोशनी बनी रहती है । शोच त्याग करते समय मुंह बंद रखना चाहिए । शोच के वक्त सामने की ओर थोड़ा झुककर बैठना बेहतर होता है, ताकि पेट पर दबाब पडे ।

कहने का अर्थ यह है कि इंगलिश कमोड की बजाए इंडियन कमोड का इस्तेमाल ज्यादा हितकारी है । मल विसर्जन के समय ध्यान भी इसी क्रिया पर होना चाहिए । आजकल टॉयलट में अखबार पढ़ने या संगीत सुनने का फैशन चल पड़ा है, जो ठीक नहीं है । आयुर्वेद में शोच क्रिया के बाद मलायन शोधन यानि गुदा द्वार को साफ पानी से अच्छी तरह से धोने को कहा गया है । बाद में हाथ साबुन या लिक्विड सोप से भली भांति धो लेना चाहिए ।

3     मुंह धोना : शोच क्रिया के बाद बारी आती है मुख प्रक्षालन यानी मुह धोने की । इसके अंतर्गत आगे की ओर थोड़ा झुककर ठंडे पानी से मुंह धोएं और आंखों में पानी के छींटे मारें । इस क्रिया को मुख शोधन भी कहा जाता है । आयुर्वेद के अनुसार मुंह धोने की क्रिया चुल्लु में पानी लेकर करनी चाहिए । मुंह में पानी भरकर अच्छी तरह से कुल्ला करने के बाद मुंह से पानी निकाल दें । इससे जीव व दांतों की भी सफाई होती है ।

4      दांत और जीव की सफाई : मुख प्रक्षालन के बाद दंत धावन यानी दातौन करने का जिक्र आता है । दातौन बारह अंगुल लम्बी तथा दातौन करने वाली की कनिष्ठा उंगली की मोटाई वाली होनी चाहिए । दंत धावन के लिए उन वृक्षों को उत्तम माना गया है जिनका स्वाद कषाय यानी कसैला या तिक्त यानी कड़वा होता है, जैसे नीम, बबूल, वट, विजयसार, खैर, करंज, अपामार्ग, अर्जुन, जामुन, निर्गुंडी आदि । इन वृक्षों में से किसी एक की टहनी तोड़कर पहले दातौन बनाए, उसके अगले भाग को आराम से कुचल-कुचल कर कूची बनाएं । दातौन करते समय आप तृफला चूर्ण (हरड़, बहेडा और आंवला ) व त्रिकटु चूर्ण (सौंठ, काली मिर्च और पिप्पली ) और त्रिजात चूर्ण (छोटी एवं बड़ी इयालची और तेजपत्ता) मधु के साथ मंजन की तरह इस्तेमाल करें । यदि दातौन का रोजाना मिल पाना कठिन हो, तो ब्रश की मदद से भी इन चूर्णो को लेकर आप दांतों को धो सकते हैं । इससे मुख की दुर्गधं तो मिटती ही है, मसूडों को मसाज के रूप में व्यायाम भी मिलता है और दांत भी मोती की तरह चमकने लगते हैं

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